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Md BairamRakee

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Bureau Report

 

 

🔴 ऐतिहासिक लेख:

“काला कोट: एक वकील नहीं, चलती-फिरती अदालत है!”

(अब भारत पूछेगा — क्या सचमुच वकील सिर्फ मुक़दमा लड़ता है या समाज की आत्मा बचाता है?)

✍️ लेखक:
Md Bairam Rakee
Advocate, District Bar Association, Khagaria, Bihar
M.Sc., MA, & LLB
📧 mullbmu@gmail.com | 📧 mdbairamrakee786narmada403@gmail.com
📱 +91 6202278353

⚖️ “एक वकील के लिए…”

कोई वकील जब सुबह काला कोट पहनता है,
तो वो सिर्फ़ अपने क्लाइंट की फाइल नहीं उठाता —
वो उठाता है टूटे हुए भरोसे का बोझ,
अनसुनी चीखों की गूंज, और उस उम्मीद की लौ जिसे पूरा सिस्टम बुझा चुका होता है।

👨‍⚖️ अदालत उसकी कर्मभूमि है —
जहाँ उसके हथियार होते हैं संविधान, तर्क और सच्चाई।
वो जानता है कि सामने

कभी भ्रष्ट पुलिस अफ़सर होंगे,

कभी झूठे गवाह,

और कभी खुद सिस्टम की दीवारें।

लेकिन फिर भी वो लड़ता है —
क्योंकि उसे यकीन है कि
“क़ानून थक सकता है, लेकिन झुक नहीं सकता!”

💼 हर दिन एक नया युद्ध होता है —

किसी दिन वो रेप पीड़िता की आवाज़ होता है,

तो कभी वो जेल में सड़ते निर्दोष युवक का आखिरी सहारा।

किसी दिन ज़मीन से उजाड़े किसान का वकील,

तो कभी तलाक़शुदा औरत के अधिकार का संरक्षक।

हर तारीख़ पर उसका एक ही मकसद होता है —
“सच को साबित करना, चाहे सामने सैकड़ों झूठ खड़े हों!”

⏳ जब तारीख़ पे तारीख़ मिलती है…

जब सालों से केस लटकता है,
जब क्लाइंट रोते हैं, टूटते हैं…
तब भी वो वकील कहता है:
“इंसाफ़ देर से मिलेगा, लेकिन मिलेगा ज़रूर!”

🖋️ एक वकील का संघर्ष वो नहीं देखता जो सिर्फ फैसले पढ़ता है —

उसे वो देखता है जो एक क्लाइंट की आँखों में आँसू देखता है,
जो रात भर दलीलों की तैयारी करता है,
जो हर तारीख़ पर अपनी आत्मा पेश करता है अदालत में।

💬 तो सवाल उठता है — “वकील क्यों करता है ये सब?”

क्योंकि वकील सिर्फ़ केस नहीं लड़ता —
वो सिस्टम से टकराकर, इंसाफ़ को ज़िंदा रखने की लड़ाई लड़ता है!
वो मानता है —
“न्याय सिर्फ़ क़ानूनी लड़ाई नहीं, एक पवित्र जिम्मेदारी है।”

📣 Legal Talk कहता है:

“वकालत पेशा नहीं, सेवा है — और हर वकील समाज की रीढ़ है!”
जिस दिन वकील थक गए,
उस दिन इंसाफ़ मारा जाएगा।

🧨 यह लेख हर कोर्ट, हर लॉ कॉलेज, हर गाँव और शहर में पहुँचना चाहिए — ताकि दुनिया जान सके कि वकील सिर्फ फीस नहीं लेते, वो एक पूरी व्यवस्था को ज़िंदा रखते हैं।

अब हिंदुस्तान पूछेगा —
“क्या अदालतें काग़ज़ से चलती हैं या उन वकीलों की रगों में दौड़ते संविधान से?”

🛑 MdBairamRakee
(इसे हर वकील, लॉ स्टूडेंट और इंसाफ़ चाहने वाले तक पहुँचाएँ — ये सिर्फ़ लेख नहीं, एक मिशन है।)

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